Радим Навьян

Издание было подготовлено для нужд Бенаресского Колледжа и не предполагало придания широкой огласке. В него вошёл коренной текст и перевод двух первых Четвертей «Раджа-мартанды». Изданы отдельными брошюрами (Book I, Book […]

ईश्वर–प्रणिधानस्य फलम् आह– Оглашается आह плод फलम् упования в Господе ईश्वर–प्रणिधानस्य – ॥ समाधि–सिद्धिः ईश्वर–प्रणिधानात् ईश्वरे यत् प्रणिधानं भक्ति–विशेषः। तस्मात् समाधेः उक्त–लक्षणस्य अविर्भावः भवति, यस्मात् सः भगवान् ईश्वरः, प्रसन्नः सन्, […]

तपसः फलम् आह– Оглашается आह плод फलम् подвижничества तपसः – ॥ काय–इन्द्रिय–सिद्धिः अशुद्धि–क्षयात् तपसः तपः समभ्यस्यमानं चेतसः क्लेश–आदि–लक्षण–अशुद्धि–क्षय–द्वारेण काय–इन्द्रियाणां सिद्धि–प्रकर्षम् आदधाति। Подвижничество तपः, будучи должным образом практикуемо समभ्यस्यमानं, приносит आदधाति […]

Для вновь прибывших. Кроме комментария «Царственное Светило», который находится в переводе, остальные тексты по философии йоги выложены главным образом исключительно в виде первоисточника или не выложены вовсе. Дело в том, […]

संतोष–अभ्यासस्य फलम् आह– Оглашается आह плод फलम् практики полного довольствия संतोष–अभ्यासस्य – ॥ संतोषात् अनुत्तमः सुख–लाभः संतोष–प्रकर्षेण योगिनः तथा–विधमान्तरं सुखम् आविर्भवति यस्य बाह्यं विषय–सुखं शतांशेन अपि न समम्॥ В связи […]

शौचस्य एव फल–अन्तरम् आह– Называется आह ещё один плод फल–अन्तरम् всё тех же एव чисток शौचस्य– ॥ सत्त्व–शुद्धि–सौमनस्य–एकाग्रता–इन्द्रिय–जय–आत्म–दर्शन–योग्यत्वानि च «भवन्ति» इति वाक्य–शेषः। Остаётся добавить वाक्य–शेषः «бывают भवन्ति» इति। सत्त्वं= प्रकाश–सुख–आदि–आत्मकम्। […]

ब्रह्मचर्य–अभ्यासस्य फलम् आह– Плод फलम् блюдущего девство ब्रह्मचर्य–अभ्यासस्य आह– ॥ ब्रह्मचर्य–प्रतिष्ठायां वीर्य–लाभः यः किल ब्रह्मचर्यम् अभ्यस्यति तस्य तद्–प्रकर्षात् निरतिशयं वीर्यं सामर्थ्यम् आविर्भवति। वीर्य–निरोधे हि ब्रह्मचर्यस्य प्रकर्षात् शरीर–इन्द्रिय–मनःसु वीर्यं प्रकर्षम् आगच्छति॥ […]

अस्तेय–अभ्यासवतः फलम् आह– Результат फलम् у блюдущего заповедь «не укради» अस्तेय–अभ्यासवतः आह– ॥ अस्तेय–प्रतिष्ठायां सर्व–रत्न–उपस्थानम् अस्तेयं यदा अभ्यसति, तदा अस्य तद्–प्रकर्षात् निरभिलाषस्य अपि सर्वतः दिव्यानि रत्नानि उपतिष्ठन्ते॥ Когда यदा лицо […]