свитки

Путь. Парадокс в том, что Путь не увидеть глазами, не пройти ногами. В каком-то смысле слово «Путь» сбивает с толку больше, чем даёт понимания. Выглядит так, что нужно бравым маршем […]

९. कपिल–वासुदेव–सांख्य–पक्षः अथ सांख्य–पक्षः 01सांख्य–दर्शन–सिद्धान्तः संक्षेपात् अथ कथ्यते। सांख्य–शास्त्रं द्विधा–भूतं– सेश्वरं च, निरीश्वरम्॥ 02चक्रे निरीश्वरं सांख्यं कपिलः, अन्यत् पतञ्जलिः। कपिलः वासुदेवः स्यात्, अनन्तः स्यात् पतञ्जलिः॥ 03ज्ञानेन मुक्तिं कपिलः, योगेन आह […]

Весьма символично: уже заканчивая перевод комментария к первой кāрике, посвящённой страданию как провокатору тяги к Знанию, я… заболел и слёг. Обманчивая осенняя погода. Вышел недостаточно тепло одетым, потащился через весь […]

यः अयं लौकिकः, वैदिकः च व्यवहारः, सः उत्पन्न–विवेक–ज्ञानस्य स्थित–प्रज्ञस्य अविद्या–कार्यत्वात् अविद्या–निवृत्तौ निवर्तते, अविद्यायाः च विद्या–विरोधात् निवृत्तिः – इति एतम् अर्थं स्फुटी–कुर्वन्, आह– या निशा सर्व–भूतानां, तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति […]

विशेष–दर्शिनः आत्म–भाव–भावना–विनिवृत्तिः यथा प्रावृषि तृण–अङ्कुरस्य उद्भेदेन तद्–बीज–सत्ता अनुमीयते, तथा मोक्ष–मार्ग–श्रवणेन यस्य रोम–हर्ष–अश्रु–पातौ दृश्येते तत्र अपि अस्ति विशेष–दर्शन–बीजम् अपवर्ग–भागीयं कर्म–अभिनिर्वर्तितम्, इति अनुमीयते। तस्य आत्म–भाव–भावना स्वाभाविकी प्रवर्तते। Как по появлению побегов растений […]

* ЙБх * РМ * ТВ * ЙВ * ЙБВ * ЙСА * विशेष–दर्शिनः आत्म–भाव–भावना–विनिवृत्तिः вищеша-дарщинах āтма-бхāва-бхāванā-винивр̊ттих вищеша-дарщинах – у носителя различающего воззрения; āтма-бхāва-бхāванā-винивр̊ттих – прекращение дум о своебытии У […]