свитки

Мой перевод см. здесь. ॥ हरिः ॐ॥ 01«ॐ» इति एतत् अक्षरम् इदं सर्वम्। तस्य उपव्याख्यानम्– भूतं, भवत्, भविष्यत् – इति सर्वम् ओंकारः एव। यत् च अन्यत् त्रिकाल–अतीतं, तत् अपि ओंकारः […]

01ईशा वास्यम् इदं सर्वम्; यत्किंच जगत्यां जगत्,। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः; मा गृधः कस्य स्वित् धनम्॥ ӣщā вāсйам идам̇ сарвам̇; йатким̇ча жагатйāм̇ жагат. тена тйактена бхун̃жӣтхāх; мā гр̊дхах касйа свит дханам.. […]

Путь. Парадокс в том, что Путь не увидеть глазами, не пройти ногами. В каком-то смысле слово «Путь» сбивает с толку больше, чем даёт понимания. Выглядит так, что нужно бравым маршем […]

९. कपिल–वासुदेव–सांख्य–पक्षः अथ सांख्य–पक्षः 01सांख्य–दर्शन–सिद्धान्तः संक्षेपात् अथ कथ्यते। सांख्य–शास्त्रं द्विधा–भूतं– सेश्वरं च, निरीश्वरम्॥ 02चक्रे निरीश्वरं सांख्यं कपिलः, अन्यत् पतञ्जलिः। कपिलः वासुदेवः स्यात्, अनन्तः स्यात् पतञ्जलिः॥ 03ज्ञानेन मुक्तिं कपिलः, योगेन आह […]

Весьма символично: уже заканчивая перевод комментария к первой кāрике, посвящённой страданию как провокатору тяги к Знанию, я… заболел и слёг. Обманчивая осенняя погода. Вышел недостаточно тепло одетым, потащился через весь […]

यः अयं लौकिकः, वैदिकः च व्यवहारः, सः उत्पन्न–विवेक–ज्ञानस्य स्थित–प्रज्ञस्य अविद्या–कार्यत्वात् अविद्या–निवृत्तौ निवर्तते, अविद्यायाः च विद्या–विरोधात् निवृत्तिः – इति एतम् अर्थं स्फुटी–कुर्वन्, आह– या निशा सर्व–भूतानां, तस्यां जागर्ति संयमी। यस्यां जाग्रति […]