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अभिनिवेशस्य लक्षणम् अह– Объявляется अह определение लक्षणम् зацепки за жизнь अभिनिवेशस्य– ॥स्व–रस–वाही विदुषः अपि तथा–रूढः अभिनिवेशः पूर्व–जन्म–अनुभूत–मरण–दुःख–अनुभव–वासना–बलात् भय–रूपः समुपजायमानः «शरीर–विषय–आदेः मम वितोगः मा भूत्» इति अन्वहम् अनुबन्ध–रूपः सर्वस्य एव आकृमेः […]

У меня напереведено столько всего и в разных местах, что сам чёрт ногу сломит. Случайно наткнулся на перевод упоминавшегося вчера отрывка из Махабхараты. Для полноты картины… Кто такой Нахуша? Пусть […]

क्लेश–मूलः कर्म–आशयः दृष्ट–अदृष्ट–जन्म–वेदनीयः Вместилище дел कर्म–आशयः, которое придётся отведать в обозримом и необозримом рождении दृष्ट–अदृष्ट–जन्म–वेदनीयः, корнем имеет обременения क्लेश–मूलः Тот случай, когда я могу более менее разобрать грамматику, но не […]

एवं क्लेशानां तत्त्वम् अभिधाय, कर्म–आशयस्य तद्– अभिधातुम् आह– ॥ क्लेश–मूलः कर्म–आशयः दृष्ट–अदृष्ट–जन्म–वेदनीयः «कर्म–आशयः» इति अनेन स्वरूपं तस्य अभिहितम्। अतः वासना–रूपाणि एव कर्माणि। «क्लेश–मूलः» इति अनेन कारणम् अभिहितं यतः कर्मणां शुभ–अशुभानां […]

[ЙА] स्वाध्यायात् इष्ट–देवता–संप्रयोगः [ЙБ]देवाः ऋषयः सिद्धाः च स्वाध्याय–शीलस्य दर्शनं गच्छन्ति, कार्ये च अस्य वर्तन्ते इति। [ЙВ] संप्रयोगः= दर्शनम्। यां देवतां द्रष्टुम् इच्छति, सा एव दृश्या भवति, इति अर्थः। सुगमं भाष्यम्॥ […]

अथ प्रयोजनम्। Теперь अथ побуждение प्रयोजनम्। येन प्रयुक्तः प्रवर्तते, तत् प्रयोजनम्। यम् अर्थम् अभीप्सन्, जिहासन् वा कर्म आरभते, तेन अनेन सर्वे प्राणिनः सर्वाणि कर्माणि सर्वाः च विद्याः व्याप्ताः, तद–आश्रयः च […]

Перебирал старые тетради. Среди записок о способах маринования грибов и дневниковых записей, ждущих своего часа, наткнулся на попытку музицировать в стихах. Данное сочинение отражает огромный пласт моих внутренних исканий. Вообще […]