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[ЙА] स्वाध्यायात् इष्ट–देवता–संप्रयोगः [ЙБ]देवाः ऋषयः सिद्धाः च स्वाध्याय–शीलस्य दर्शनं गच्छन्ति, कार्ये च अस्य वर्तन्ते इति। [ЙВ] संप्रयोगः= दर्शनम्। यां देवतां द्रष्टुम् इच्छति, सा एव दृश्या भवति, इति अर्थः। सुगमं भाष्यम्॥ […]

अथ प्रयोजनम्। Теперь अथ побуждение प्रयोजनम्। येन प्रयुक्तः प्रवर्तते, तत् प्रयोजनम्। यम् अर्थम् अभीप्सन्, जिहासन् वा कर्म आरभते, तेन अनेन सर्वे प्राणिनः सर्वाणि कर्माणि सर्वाः च विद्याः व्याप्ताः, तद–आश्रयः च […]

Перебирал старые тетради. Среди записок о способах маринования грибов и дневниковых записей, ждущих своего часа, наткнулся на попытку музицировать в стихах. Данное сочинение отражает огромный пласт моих внутренних исканий. Вообще […]