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2.2:11पूरण–गुण–सुहितार्थ–सद्–अव्यय–तव्य–समानाधिकरणेन [सुप्]1:9 [सह सुपा]1:4 [षष्ठी]8 [तत्पुरुषः]1:22 [समासः]1:3 [न]10 [Субанта]1:9 [в родительном падеже]9 [не]10 <образует> [сложное слово]1:3 [<вида> татпуруша]1:22 [с субантой]1:4 имеющей значение пуран̣а, гун̣а, сухита, либо неизменяемой частью речи (авйайа), […]

Индийская народная сказка Обработка: Р. Навьян Зн.: 497 1एकदा अङ्गुलीनां मध्ये पुरुषस्य व्यवहारे कस्याः प्राधान्यम् इति विवादः अवर्तत। 2अङ्गुष्ठा उवाच– – 3न केवलं अहम् आकारेण स्थूलतमा, अपितु मां विना पुरुषः […]

बुधिमान् (बुद्धिमान्), विरुद्धः बलवान् <च> Автор: S. Iyer Редактура и перевод: Р. Навьян Зн.: 391 (без правок) 1एक: बुद्धिमान्, अपर: बलवान्। 1Один — Умник, другой — Силач. 2एकदा बलवान्, बुद्धिमतः […]

मम काकः (Моя Ворона)

Автор: Р. Навьян (2020, 29 мая) Автор выражает отдельную благодарность господину Мурти за рецензирование данного текста. Зн.: 724 1मम गृहस्य समीपे एकः एश–वृक्षः (ash-tree) वर्तते। 2एतस्मिन् वर्षे वसन्तः अत्युष्णः जातः। […]

Зн.: 313 1एकस्मिन् ग्रामे एका अन्धा सुन्दरी कन्यका निवसति स्म। 2तत्रत्य–जनाः तां भाग्य–हीनां सदा निन्दन्ति स्म। 3परंतु अमुकः युवकः तां प्रति दयां प्रदर्शितवान्, तस्याः न्यूनतां निवारयित्वा, तां परिणेतुम् अपि वचनं […]

कुताबाः (Кутабы)

Автор: Р.Навьян (2020, 28 мая) Автор выражает отдельную благодарность господину Мурти за рецензирование данного текста. Зн.: 411 1एकदा उत्तर–वसन्त–काले अहम् उद्याने भ्रमितुं गच्छामि। 2अथ मार्ग–पार्श्व–स्थितं कंचित् शूद्रं आलोकयामि। 3aसः माम्– […]