наука

न हि किंचित् अपूर्वम् अत्र वाच्यम् न च संग्रन्थन–कौशलं मम अस्ति। अतः एव न मे परार्थ–चिन्ता स्वमनः वासयितुं कृतं मया इदम्॥ σ: न हि अत्र किंचित् अपूर्वम् वाच्यम्। न च […]

सुगतान् ससुतान् सधर्मकायान् प्रणिपत्य आदरतः अखिलान् च वन्द्यान्। सुगत–आत्मज–संवर–अवतारम् कथयिष्यामि यथा–आगमं समासात्॥ σ: सुगतान् ससुतान्, सधर्मकायान्, अखिलान् च बन्द्यान् आदरतः प्रणिपत्य, सुगत–आत्मज–संवर–अवतारम् यथा–आगमं समासात् कथयिष्यामि। сугатāн сасутāн садхармакāйāн пран̣ипатйа āдаратах […]

कर्मणि एव अधिकारः ते, मा फलेषु कदाचन। मा कर्म–फल–हेतुः भूः, मा ते संगः अस्तु अकर्मणि॥ Поскольку текст проблемный, то составить синтагму сразу не получится. Мы сделаем иначе: разметим текст на […]

विशेषणं पुरस्कृत्य, विशेष्यं तद्–अनन्तरम्। कर्तृ–कर्म–क्रिया–युक्तम् – एतत् अन्वय–लक्षणम्॥ विशेषणं पुरस्कृत्य, विशेष्यं तद्–अनन्तरम्। विशेषणं — ср.р. е.ч. и.п. сущ. действия от वि+शिष् — разделять, расчленять, определять. тут грамматический термин — определение. […]

जगत् अद्य निमन्त्रितं मया सुगतत्वेन सुखेन च अन्तरा। पुरतः खलु सर्व–तायिनाम् अभिनन्दन्तु सुर–असुर–आदयः॥ σ: अद्य सुगतत्वेन, अन्तरा सुखेन च जगत् निमन्त्रितं मया। सुर–असुर–आदयः सर्व–तायिनां पुरतः खलु अभिनन्दन्तु। жагат адйа нимантритам̇ […]

सुख–भोग–बुभुक्षितस्य वा जन–सार्थस्य भव–अध्व–चारिणः। सुख–सत्रम् इदं हि उपस्थितम् सकल–अभ्यागत–सत्त्व–तर्पणम्॥ σ: सुख–भोग–बुभुक्षितस्य वा भव–अध्व–चारिणः जन–सार्थस्य इदं हि उपस्थितम् सुख–सत्रम्, सकल–अभ्यागत–सत्त्व–तर्पणम्। сукха-бхога-бубхукшитасйа вā жана-сāртхасйа бхава-адхва-чāрин̣ах. сукха-сатрам идах хи упастхитам сакала-абхйāгата-саттва-тарпан̣ам.. А для […]

जगद्–अज्ञान–तिमिर– प्रोत्सारण–महारविः। सद्धर्म–क्षीर–मथनात् नवनीतं समुत्थितम्॥ σ: <एतत्> जगद्–अज्ञान–तिमिर–प्रोत्सारण–महारविः, सद्धर्म–क्षीर–मथनात् समुत्थितम् नवनीतम्। жагад-ажн̃āна-тимира- протсāран̣а-махāравих. саддхарма-кшӣра-матханāт наванӣтам̇ самуттхитам.. <Это > могучее солнце, рассеивающее потемки мирского невежества, <это> сливочное масло, получившееся в результате […]

दुर्गति–उत्तरणे सेतुः सामान्यः सर्व–यायिनाम्। जगत्–क्लेश–उपशमनः उदितः चित्त–चन्द्रमाः॥ σ: दुर्गति–उत्तरणे सर्व–यायिनाम् सामान्यः सेतुः, उदितः चित्त–चन्द्रमाः, जगत्–क्लेश–उपशमनः। дургати-уттаран̣е сетух сāмāнйах сарва-йāйинāм. жагат-клеща-упащаманах удитах читта-чандрамāх.. <Это> общий для всех идущих мост при преодолении […]

जगद्–व्याधि–प्रशमनम् भैषज्यम् इदम् उत्तमम्। भव–अध्व–भ्रमण–श्रान्त– जगद्–विश्राम–पादपः॥ σ: इदम् उत्तमम् भैषज्यम्, जगद्–व्याधि–प्रशमनम्। <एषः> भव–अध्व–भ्रमण–श्रान्त–जगद्–विश्राम–पादपः। жагад-вйāдхи-пращаманам бхаишажйам идам уттамам. бхава-адхва-бхраман̣а-щрāнта- жагад-вищрāма-пāдапах.. Это превосходное снадобье, исцеляющее от мирских болезней (или от недомогания миром […]

जगद्–मृत्यु–विनाशाय जातम् एतत् रसायनम्। जगद्–दारिद्र्य–शमनम् निधानम् इदम् अक्षयम्॥ σ: एतत् रसायनम् जगद्–मृत्यु–विनाशाय जातम्, इदम् अक्षयम् निधानम् जगद्–दारिद्र्य–शमनम्। жагад-мр̊тйу-винāщāйа жāтам етат расāйанам. жагад-дāридрйа-щаманам нидхāнам идам акшайам.. Это эликсир, рожденный для устранения […]