Раджа-мартанда 2:44

स्वाध्यायस्य फलम् आह–
Оглашается आह плод फलम् молитвословия स्वाध्यायस्य–
स्वाध्यायात् इष्ट–देवता–संप्रयोगः
अभिप्रेत–मन्त्र–जप–आदि–लक्षणे स्वाध्याये प्रकृष्यमाणे, योगिनः इष्टया अभिप्रेतया देवतया संप्रयोगः भवति । सा देवता प्रत्यक्षा भति, इति अर्थः॥
Когда ведётся प्रकृष्यमाणे молитвословие स्वाध्याये, характеризуемое еле слышным повторением избранной молитвы अभिप्रेत–मन्त्र–जप–आदि–लक्षणे, у подвижника योगिनः происходит भवति контакт संप्रयोगः с избранным इष्टया (=अभिप्रेतया) божеством देवतया। Иначе говоря इति अर्थः, это सा божество देवता становится भवति доступным восприятию प्रत्यक्षा।

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