यो॰ सू॰ ३.०५

तज्जयात्प्रज्ञालोकः ॥ ५ ॥
[1924] तज्जयात् प्रज्ञालोकः ॥ ५ ॥
[1952] तज्जयात् प्रज्ञाऽऽलोकः ॥ ५ ॥

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