व्या॰ भा॰ १.०६

॥१.६॥ इस सूत्र में शास्त्रकार ने केवल वृत्तियों के नाम ही बतलाये हैं, इस कारण भाष्यकार ने भी कुछ भाष्य की आवश्यकता न होने से भाष्य नहीं किया ।

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